काम क्रोध मद लोभ अहम
सर्वे भवंतु सुखिन: भाग-1 काम क्रोध मद लोभ अहम कर ले तू सब को वश में जो गुरू उपदेश के अनुरूप हो ग्रहण करें। काम क्रोध मद लोभ अहम कर ले तू सब को वश में यह वेद का संदेश है यह गीता का संदेश है यह दर्शन, उपनिषदों का संदेश है यह बाैद्ध दर्शन का संदेश है यह जैन दर्शन का संदेश है अधिकतर बहुत से ग्रंथों का संदेश है कि विकारों से आसक्ति ही बंधन है विकारों से अनासक्ति ही मुक्ति है इसीलिये आरती में विकारों से मुक्त होना ही प्रभु दर्शन/साक्षात्कार की कुंजी/चाबी बतायी गयी है इसीलिये आरती में प्रथम तो प्रश्न किया है कि है जगत के ईश आप अगोचर हैं, यानि कि आप दिखाई नहीं देते हैं तो किस विधी से आप से मिलें जिसका उत्तर भी आरती में ही दिया है कि विषय विकार मिटाओ पाप हरो देवा वेद, गीता, दर्शन, भगवान बुद्ध, महावीर स्वामी आदि सभी का कहना है कि जो इन्द्रियों पर विजय पाता है, वही इन्द्रजीत है वहीं जितेन्द्रिय है, वही वीर है, वही मनजीत है, वही महापुरूष है वही सत्पु...